विरोधाभास में फंसा “सुपर कल्चर” वाला राजस्थान का क्षत्रिय
Irony का एक उदाहरण: कुछ साल पहले तक राजस्थान के क्षत्रियों में एक inherent superiority देखी जाती थी। यहां के राजपूत अपनी distinctive cultural heritage
क्षत्रियों का संकीर्ण दृष्टिकोण (Parochial Outlook of Kshatriyas)
एक जाति के रूप में राजपूत संभवतः इस देश में यूनिक है। वैसे तो जातिय दंभ इस उपमहाद्वीप की लगभग हर प्रभावशाली जातियों में देखने
नरेटिव की दुनिया में असाहय हमारे क्षत्रिय सामाजिक संगठन
आज इस देश की हर जाति victim card खेलने में लगी है। फर्जी Atrocity literature बनाकर ब्राउनी पॉइंट्स इकट्ठा करने में तल्लीन है। हर रोज
Systematic Distortion of Kshatriya History
1. Why distort History of Kshatriyas? Prominent Political thinker George Orwell remarked that “The most effective way to destroy a people is to deny and
“Origin of Rajputs”: A Political Exercise
1. Why The Obsession? यह सर्वविदित है कि लठैत जातियों और वामपंथ का आवरण ओढ़े ब्राह्मणवादी बौद्धिक वर्ग ने सभी क्षत्रियों को सामंत और सामंतवाद
Media Trial of Kshatriyas
1. “ठाकुर का कुआं“: वर्चस्व की हकीकत छिपाता मिडिया कुख्यात नाज़ी प्रोपगैंडिस्ट जोसेफ गोएबल्स के अनुसार “”यदि आप किसी झूठ को बार-बार दोहराएंगे, तो अंततः
Cinematic Caricaturing of Kshatriyas
Cinema: A Tool of Mass Propaganda by the Rich & Powerful Aldous Huxley लिखते हैं “”दुष्प्रचार करने वालों का उद्देश्य सर्व समाज को यह भुला
क्षत्रिय और फॉरवर्ड कास्ट का मिथक
क्षत्रियों को फॉरवार्ड जातियों के साथ शामिल किया जाना उनके साथ किया गया सबसे बड़ा खेल था। कुछ चंद राजे रजवाड़ों को छोड़ दिया जाए
Kshatriyas (Rajputs) : A Race of Soldiers & Farmers
इतिहास में 99 % क्षत्रिय आम सैनिक और किसान रहे हैं। पुराने जमाने मे क्षत्रिय परिवार अपने वंश/कुल/भाईबंध के जागीरदार/ठिकानेदार/तालुकेदार के आश्रित होते थे। जागीरदार
क्षत्रिय विरोधी दुष्प्रचार और क्षत्रिय एलिट की उदासीनता
आज अगर कोई 1880 से 1947 तक राजस्थान का राजनीतिक और आर्थिक इतिहास पढ़ने बैठे तो कोई अपवाद दृष्टांत ही होगा जिसमे राजपूत शासन व्यवस्था









